हैं शब्दों से कुछ हासिल, यहीं कहता हैं मेरा-दिल कि ...
कभी रगों के लहू से टपकी, तो कभी बदन के पसीने से। कभी थरथराते होटों से, तो कभी धधकते सीने से। टपकी है हर बार, आजादी, यहाँ घुट-घुट के जीने स...