Thursday, March 11, 2010

गगन चुम्बी इमारतों के बीच से

गगन चुम्बी इमारतों के बीच से

जाती हुई एक सड़क पे

गाड़ियों की क़तर में
मैं बैठा किसी किनारे
देख रहा हूँ उन गाड़ियों में
बैठे लोगों को
शायद पहचानू किसी को|
नजरे मिलती हैं एक खालीपन से|
इस भीड़ में चलते हुई हम सब

अजनबी है|


2 comments:

डिम्पल मल्होत्रा said...

आपकी काफी रचनाये पढ़ी.सब इक से इक बढकर है.

SATYAKAM said...

bahut bahut dhanybad jo aap aayi aur humare blog ko padhi :)

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