Monday, February 23, 2015

कोई भुला आज याद आ रहा हैं

कोई भुला आज याद आ रहा हैं
दिल थम-थम के डूबा जा रहा हैं
वो कौन सा सिरा हैं ऊन नज़रों का
जो रह-रह के चुभा जा रहा हैं

कोई भुला आज याद आ रहा हैं
दर्द नहीं, फिरभी मन दुःखा जा रहा हैं
सपनों का कौन सा परिंदा,
पिंजड़ा तोड़ उड़ा जा रहा हैं

कोई भुला आज याद आ रहा हैं

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